
देहरादून। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर (आईआईटी कानपुर) ने समग्र शिक्षा उत्तराखंड के साथ मिलकर 12 मई 2026 को एक बड़े स्तर पर साइबर सुरक्षा जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस पहल में उत्तराखंड के 173 सरकारी स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया, वहीं देशभर से 15,000 से अधिक छात्र इस कार्यक्रम से जुड़े।
यह वर्चुअल सत्र उत्तराखंड के 160 अटल टिंकरिंग लैब्स (एटीएल), 13 एस्ट्रोफिजिक्स लैब्स और 8 साथी केंद्रों के माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, नागालैंड, जम्मू-कश्मीर और तेलंगाना के छात्रों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के छात्रों की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
सत्र के दौरान छात्रों को साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के बारे में जानकारी दी गई। इसमें ईमेल और सोशल मीडिया सुरक्षा, हैकिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी, व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, पासवर्ड सुरक्षा और जिम्मेदारी से इंटरनेट इस्तेमाल करने जैसे विषय शामिल रहे। छात्रों को वास्तविक उदाहरणों के जरिए साइबर खतरों और उनसे बचाव के तरीकों को भी समझाया गया। यह सत्र बेनेट यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव ने संबोधित किया।
कार्यक्रम काफी इंटरैक्टिव रहा और अंत में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने साइबर सुरक्षा और डिजिटल जिम्मेदारी से जुड़े कई सवाल पूछे।
इस कार्यक्रम में अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग के इनोवेशन लीड शुभम गुप्ता ने भी मुख्य वक्ता के रूप में हिस्सा लिया। उन्होंने देशभर में अटल टिंकरिंग लैब्स के माध्यम से नवाचार आधारित शिक्षा और डिजिटल जागरूकता के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, आज के छात्रों को केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों को भी समझना जरूरी है। डिजिटल दौर में साइबर सुरक्षा और जिम्मेदारी से इंटरनेट का इस्तेमाल करना एक जरूरी जीवन कौशल बन चुका है।
इस पहल के जरिए आईआईटी कानपुर ने स्कूल छात्रों के बीच डिजिटल साक्षरता और साइबर जागरूकता को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया है, ताकि छात्र तकनीक से जुड़ी दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ सकें।

