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“मिलेट्स फॉर मॉडर्न किचन्स एंड वेलनेस” ने देहरादून में भोजन, स्वास्थ्य और सजग जीवनशैली को एक मंच पर लाया

देहरादून | देहरादून में मिलेट्स, स्वास्थ्य और आधुनिक खाद्य संस्कृति पर केंद्रित एक विशेष एवं सुविचारित आयोजन का आयोजन किया गया। सोलफिट और देहरादून फूड लिटरेचर फेस्टिवल ने फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर के सहयोग से “मिलेट्स फॉर मॉडर्न किचन्स एंड वेलनेस” कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
यह विशेष आमंत्रण आधारित अनुभवात्मक आयोजन था, जिसमें भोजन, पोषण, आतिथ्य, मीडिया और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रमुख लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक रसोई में मिलेट्स की भूमिका और आज की स्वास्थ्य-केंद्रित जीवनशैली में उनकी प्रासंगिकता पर सार्थक चर्चा करना था।
शाम का मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध मिलेट विशेषज्ञ और सेलिब्रिटी शेफ विकास चावला, जिन्हें “द मिलेट शेफ” के नाम से जाना जाता है, तथा पोषण विशेषज्ञ एवं सोलफिट की संस्थापक रूपा सोनी के बीच हुई रोचक और ज्ञानवर्धक बातचीत रही। संवादात्मक शैली में आयोजित इस सत्र में चर्चा की गई कि क्यों मिलेट्स को केवल पारंपरिक अनाज नहीं, बल्कि स्वस्थ और टिकाऊ जीवनशैली के लिए “भविष्य का भोजन” माना जा रहा है।
चर्चा के दौरान शेफ विकास चावला ने अपने व्यक्तिगत मिलेट्स सफर को साझा किया और मिलेट्स की पोषण संबंधी श्रेष्ठता, रक्त शर्करा नियंत्रण में उनकी भूमिका, जलवायु-संवेदनशील खेती, नई पीढ़ी को पारंपरिक खाद्य संस्कृति से जोड़ने तथा आधुनिक शहरी रसोई और उच्च स्तरीय भोजन संस्कृति में मिलेट्स की बढ़ती उपयोगिता जैसे विषयों पर विस्तार से बात की।
सत्र के दौरान शेफ विकास चावला ने कहा कि अब समय आ गया है कि मिलेट्स को फिर से हमारी रोजमर्रा की रसोई का हिस्सा बनाया जाए और भारत की पारंपरिक खाद्य विरासत से दोबारा जुड़ा जाए। उन्होंने कहा कि मिलेट्स केवल एक स्वास्थ्य चलन नहीं, बल्कि भारत की पाक परंपरा की जड़ें हैं, जो भविष्य में अधिक सजग और टिकाऊ खानपान की आदतों को आकार दे सकती हैं।
इसके बाद शेफ विकास चावला की टीम और हयात सेंट्रिक देहरादून के शेफ पुष्कर द्वारा प्रत्यक्ष पाक प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया, जिसमें “मटर और फॉक्सटेल मिलेट पुलाव” तैयार किया गया। इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि मिलेट्स किस तरह आधुनिक और स्वादिष्ट व्यंजनों का सहज हिस्सा बन सकते हैं।
कार्यक्रम में विशेष रूप से तैयार किए गए मिलेट-प्रेरित अल्पाहार मेन्यू ने भी शाम की थीम को आगे बढ़ाया। इसमें रागी काठी रोल्स, फॉक्सटेल हरा भरा कबाब, कोदो मिलेट अरंचिनी, सांवा मिलेट खीर और रागी चॉकलेट ब्राउनी जैसे व्यंजन शामिल थे, जिन्होंने मेहमानों को मिलेट्स आधारित व्यंजनों का अनूठा अनुभव दिया।
इस आयोजन में आतिथ्य, स्वास्थ्य, शिक्षा, मीडिया और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रतिष्ठित अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें फिक्की फ्लो उत्तराखंड चैप्टर की अध्यक्षा तृप्ति बहल, पूर्व अध्यक्षा कोमल बत्रा, पूर्व अध्यक्षा एवं जीबी सदस्य नेहा शर्मा, पूर्व अध्यक्षा डॉ. अनुराधा मल्लाह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मीनाक्षी सोती, उपाध्यक्ष स्मृति बायट्टा, कोषाध्यक्ष मनीत सूरी, संयुक्त कोषाध्यक्ष श्रुति गुप्ता, रूपा सोनी, रेड एफएम से रजत शक्ति, हिमाचल टाइम्स से इंद्राणी पांधी, कृषि विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. दुर्गेश पंत, भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नेहा जोशी और संपादक प्रियाक्षी गोस्वामी सहित कई अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे।
इस कार्यक्रम की संकल्पना एवं मेजबानी देहरादून फूड लिटरेचर फेस्टिवल की संस्थापक श्रुति गुप्ता और सोलफिट की संस्थापक रूपा सोनी द्वारा की गई। यह आयोजन फ्लो उत्तराखंड चैप्टर की पर्यटन एवं आतिथ्य पहलों के अंतर्गत आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की परिकल्पना पर बात करते हुए फ्लो उत्तराखंड की अध्यक्षा तृप्ति बहल ने कहा:
“देहरादून को स्थानीय, मौसमी और अपनी जड़ों से जुड़े भोजन पर अधिक संवाद और अनुभवों की आवश्यकता है। ऐतिहासिक रूप से मिलेट्स हमेशा उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, इसलिए यह हमारी जड़ों की ओर एक स्वाभाविक वापसी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम लोगों को अधिक सजग खानपान की ओर प्रेरित करना चाहते हैं और इन चर्चाओं को आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप अधिक सरल, रोचक और प्रासंगिक बनाना चाहते हैं।”
कार्यक्रम की रूपरेखा को जानबूझकर पारंपरिक पैनल चर्चा से अलग रखा गया, ताकि भोजन, स्वास्थ्य और सजग जीवनशैली के इर्द-गिर्द एक आत्मीय, संवादात्मक और जीवनशैली-केंद्रित अनुभव तैयार किया जा सके।
इस आयोजन में हयात सेंट्रिक देहरादून ने आतिथ्य सहयोगी और रेड एफएम ने रेडियो सहयोगी की भूमिका निभाई। सहयोगी साझेदारों में वैली कल्चर, ऑर्गेनिक ट्री, गेगल, हाइप फुटवियर, लिटिल मोनाल्स और डीडी कॉलेज शामिल रहे।
संवाद, पाक कला की कहानी और अनुभवात्मक आतिथ्य के अनूठे मिश्रण के माध्यम से “मिलेट्स फॉर मॉडर्न किचन्स एंड वेलनेस” ने सजग जीवनशैली के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाते हुए मिलेट्स को केवल पारंपरिक अनाज नहीं, बल्कि आधुनिक रसोई और भविष्य की खाद्य संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

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