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देहरादून में जमीनों के सौदागर भोले-भाले बनकर प्रशासन और मीडिया को कर रहे गुमराह: संजीव गुप्ता

  • रामनगर डांडा जमीन विवाद में पीड़ित संजीव गुप्ता ने प्रेस वार्ता कर रखी अपनी बात।
  • खुद को गरीब और दिव्यांग बताने वाले विरोधियों पर ही दर्ज हैं अवैध कब्जे और पेड़ काटने के मुकदमे
  • राजस्व जांच और सरकारी रिकॉर्ड में संजीव गुप्ता के नाम दर्ज है संपत्ति।

देहरादून। रामनगर डांडा (परगना परवादून, तहसील ऋषिकेश) के जमीन विवाद में नया मोड़ आ गया है। मामले के पीड़ित संजीव गुप्ता ने बुधवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि कुछ लोग खुद को गरीब और दिव्यांग किसान दिखाकर स्थानीय मीडिया और प्रशासन को लगातार गुमराह कर रहे हैं। इन लोगों ने साज़िश के तहत उन्हें ‘भूमाफिया’ साबित करने का प्रयास किया।

संजीव गुप्ता ने आधिकारिक रिकॉर्ड और घटनास्थल के साक्ष्य पेश करते हुए बताया कि आरोप लगाने वाले पक्ष खुद आदतन कानून तोड़ने वाले हैं। इन लोगों पर पहले से ही जमीन पर अवैध कब्जा करने, हरे पेड़ काटने और पुश्ता तोड़ने जैसे गंभीर मामलों का आरोप है। राजस्व विभाग की जांच में भी विरोधियों के दावों का कोई आधार नहीं मिला है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार विवादित जमीन पूरी तरह से संजीव गुप्ता के नाम पर पंजीकृत है।

उन्होंने मीडिया को बताया कि सच सामने आने और मुकदमे दर्ज होने के बावजूद आरोपी राकेश बडोनी, लक्ष्मण, अमित बडोनी, शिवम बडोनी, नागेंद्र नेगी और चंद्र किशोर बडोनी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ये लोग बार-बार भ्रामक और तथ्यहीन आरोप लगाकर उनका मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अपनी कमियों को छुपाने के लिए ये आरोपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और आईजी गढ़वाल को झूठे शिकायती पत्र भेज रहे हैं। इस मामले में ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत पूरी तरह सच साबित हो रही है। संजीव गुप्ता ने प्रशासन से न्याय और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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