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“विरासत-ए-महफिल” में मशहूर शायर इक़बाल अशहर की शायरी से विरासत हुआ “मदहोश

देहरादून। विरासत की एजुकेशनल स्टेज पर शनिवार को हेरिटेज क्विज़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न स्कूली बच्चों ने बढ़ चढ़कर प्रतिभाग किया और अपनी- अपनी प्रतिभाएं दिखाई I रीच संस्था द्वारा आयोजित किए जा रहे विरासत महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर, निंबूवाला में स्कूली विद्यार्थियों के लिए विरासत हेरिटेज क्विज़ का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में 19 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी ज्ञान क्षमता तथा त्वरित व होनहार ऊर्जावान प्रतिभा सोच का प्रदर्शन किया। क्विज़ में विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दिए। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों में उत्साह और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना, उनकी बौद्धिक क्षमता को प्रोत्साहित करना तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करना था।
प्रतियोगिता के बाद चार टीमों ने अगले चरण के लिए स्थान हासिल किया। इनमें ओक ग्रोव स्कूल की दो टीमें, समर वैली स्कूल की एक टीम और द ओएसिस की एक टीम शामिल रही। प्रत्येक टीम में दो विद्यार्थी शामिल रहे। खास बात यह रही कि विरासत की इस क्विज प्रतियोगिता में बच्चों के हुनर और जज्बे की प्रशंसा एवं सराहना की गई I क्विज़ प्रतियोगिता के इस आयोजन में प्रतिभाग करने वाले बच्चों के भीतर पूरा उत्साह और जुनून दिखाई दिया I

विरासत महोत्सव में “क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल” के नाम रहा शनिवार का दिन, कई अपराधिक घटनाओं एवं मानवाधिकारों के संबंध में जन जागरूकता के दिए गए टिप्स
उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार सहित कई ऑफिसर्स हस्तियों ने किया प्रतिभाग
विरासत महोत्सव-2026 में शनिवार को द्वितीय सत्र के दौरान “क्राइम लिट्रेचर फेस्टिवल” कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें कि उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार सहित कई ऑफिसर्स हस्तियों ने प्रतिभाग करते हुए अनेक अपराधिक घटनाओं एवं मानवाधिकारों को लेकर जन जागरूकता के विषय में महत्वपूर्ण टिप्स दिए I
रीच संस्था द्वारा आयोजित किए जा रहे इस 15 दिवसीय विरासत महोत्सव में भारत की ऐतिहासिक धरोहरों को जहां जी-जान लगाकर संकलित किया जा रहा है, वहीं जन जागरूकता से संबंधित और भी कई महत्वपूर्ण से महत्वपूर्ण जानकारियां दिए जाने का सिलसिला चल रहा है I इसी के तहत आज शनिवार को क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित किया गया, जो कि अनेक आपराधिक घटनाओं एवं मानव अधिकार आयोग में निहित अधिकारों को लेकर जागरूक करने की महत्वपूर्ण जानकारियां आला अफ़सरों द्वारा दी गयीं I
विरासत के मंच पर यह “क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल” का कर्टेन रेज़र कार्यक्रम विरासत के सभी मेहमानों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहा I दून कल्चरल एंड लिटरेरी सोसाइटी (DCLS) द्वारा प्रस्तुत इस कार्यक्रम में अपराध साहित्य, भारतीय पुलिस व्यवस्था, आंतरिक सुरक्षा और अपराध मनोविज्ञान से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ और रिटायर्ड पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने इन्हीं बिंदुओं को लेकर अपने अनुभवों को साझा किया I
कार्यक्रम की शुरुआत “द जर्नी सो फार, द रोड अहेड” सत्र से हुई, जिसमें अशोक कुमार, आलोक लाल और रूपा सोनी ने फेस्टिवल के चार वर्षों के सफर, उपलब्धियों, रोचक संवादों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। तत्पश्चात “सिक्योरिंग टुमारो” सत्र में भारत की आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों, क्षमताओं और आगे की राह पर विचार किया गया। यह चर्चा अशोक कुमार की पुस्तक “चैलेंजेज टू इंटरनल सिक्योरिटी ऑफ इंडिया” (आठवां संस्करण) पर आधारित रही। सत्र में पूर्व डीजीपी, उत्तराखंड अशोक कुमार ने जहां वक्ता के रूप में शिरकत की, तो वहीं वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्मकार सतीश शर्मा के साथ संवाद कार्यक्रम भी आयोजित हुआ, जो कि काफी महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक रहा I
आज के इस क्राइम लिटरेचर फेस्टिवल में “बिहाइंड द बैज” सत्र के दौरान यशोवर्धन आज़ाद और ताज हसन ने भारतीय पुलिस व्यवस्था के अनुभवों और उसके भीतर की कहानियों पर चर्चा की। इस संवाद का संचालन अनुपमा खन्ना ने बहुत ही ओजस्वीतथा ज्ञानवर्धक रूप में किया।
जबकि “द लॉन्ग आर्म ऑफ द लॉ” सत्र में आलोक लाल और मानस लाल ने कानून की पहुंच और अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकानों की अनुपस्थिति पर विचार साझा किए। इस सत्र में आरजे काव्या ने भी अपना अनुभव साझा किया I कार्यक्रम के अगले सत्र “इनसाइड द क्रिमिनल माइंड” में निजी जासूस देव की भागीदारी भी रही। डॉ. रूबी गुप्ता के साथ बातचीत में प्रेम, विश्वासघात, जुनून और प्रतिशोध जैसे विषयों के माध्यम से अपराधी मनोविज्ञान पर चर्चा की गई I चर्चा में अपराधियों की मानसिकता, आपराधिक व्यवहार और अपराध के पीछे के कारणों पर प्रकाश डाला गया। सत्र का मुख्य संदेश वैवाहिक अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाना, रिश्तों में सम्मान बनाए रखना तथा समाज के नियमों, कानूनों और विनियमों का पालन करने के लिए लोगों को प्रेरित करना था, ताकि एक सुरक्षित और स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।
विरासत की सांस्कृतिक संध्या में शनिवार को पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज तथा अमृता रावत भी पहुंचे
विरासत महोत्सव-2026 में आज शनिवार को उत्तराखंड सरकार में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती अमृता रावत भी पहुंचे I दोनों करीब 1 घंटे तक विरासत महोत्सव में रहे और भ्रमण कर विरासत के अद्भुत और खूबसूरत नजारों को देखा I

लोकप्रिय सांस्कृतिक कलाकार हेमा सिंह और उनके सहयोगी कलाकारों के मनमोहक नृत्यों ने किया ओत-प्रोत
विरासत की महफिल में आज हेमा सिंह व उनके सहयोगी कलाकारों द्वारा दी गई नृत्य प्रस्तुति ने सभी को ओत प्रोत कर दिया I हेमा सिंह और उनका समूह एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंडली है जो ‘एकत्वम – भारत की नृत्य परंपराओं को समर्पित प्रस्तुति’ के लिए प्रसिद्ध है। यह प्रस्तुति कला, लय और एकता का एक शानदार उत्सव है, जो कि भारत की विविध शास्त्रीय नृत्य शैलियों की समृद्ध विरासत, जटिल पद्यकला और कहानी कहने की कला को प्रदर्शित करती है। ‘एकत्वम’ विभिन्न भारतीय शास्त्रीय शैलियों (जैसे भरतनाट्यम, कथक और ओडिसी) के सार को एक एकीकृत विषय के अंतर्गत लाता है, और इस बात पर बल देता है कि पारंपरिक नृत्य की प्रत्येक गतिविधि राष्ट्रीय सांस्कृतिक पहचान का उत्सव मनाती है I मुख्य बात यह है कि कलाकारों का यह समूह अपने समन्वित समूह नृत्य, भक्तिपूर्ण मंच प्रस्तुतियों और विभिन्न क्षेत्रीय कलाकारों को एक साथ लाकर पारंपरिक जड़ों और आधुनिक शास्त्रीय प्रस्तुति के बीच सेतु बनाने के लिए अत्यधिक प्रशंसित है।

वह तवायफनामा….. जिसने हृदय को झकझोर डाला और कर दिया भावुक…..
….. गौहर जान की दिल को पसीज कर देने वाली दास्तां ने “विरासत” की स्टेज को कर दिया ग़मगीन
तवायफनामा की प्रस्तुति ने पहले तो नम की आंखें….. और बाद में भर डाले आंसू…..
विरासत महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल में उस समय विरासत की स्टेज ग़मगीन हो उठी, जब “तवायफनामा” की ऐतिहासिक सच्चाई पर आधारित प्रस्तुति का सारांश मंच-ए-स्टेज पर प्रवाहित किया गया I
पुराने दौर के नवाबों वाली नवाबी गिरी की गिरफ्त में रहे तवायफ़ नामा की प्रस्तुति ने न सिर्फ आंखें नाम कर दी, बल्कि बाद में सभी की आंखों में आंसू भी भर डाले I
तवायफनामा, दरअसल उन महिलाओं को श्रद्धांजलि दिए जाने, जिन्होंने भुलाए जाने से इनकार कर दिया था! मंच पर परफॉर्मेंस देने वाली मशहूर कलाकार गौहर जान के मंच पर विराजमान होते ही पुरजोर स्वागत हुआ I
तवायफ़नामा दरअसल,एक विस्मृत विरासत की संगीतमय पुन: कथा का बेहतरीन सार है I सुप्रसिद्ध अदाकारा गौहर जान की याद में भारत में ग्रामोफोन रिकॉर्डिंग के 125 साल हो गए हैं I पट कथा के अनुसार, एक संगीतमय नृत्य-थिएटर जो उस स्वर्ण युग को समर्पित है, जब तवायफों ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, ठुमरी, दादरा, ग़ज़ल, कथक और तहज़ीब को समृद्ध किया था। यह प्रस्तुति संगीत, नृत्य और नाटकीय अभिव्यक्ति के माध्यम से दिग्गज कलाकारों के जीवन, कला, संघर्ष और अनकही कहानियों को मंच पर जीवंत करती है। इस भव्य मंच पर डॉ. सोमा मुखर्जी का प्रदर्शन कला जनजाति (टीपीएटी) के रूप में हुआ है और 31 कलाकार ने साथ दिया, जबकि कोरियोग्राफर डॉ. सुमा बनर्जी को समर्पित गौहर जान के साथ बब्बो/बेबो जान,विद्याधरी बाई, हुस्ना बाई, असगरी बाई, अख्तरी बाई/बेगम अख्तर, जानकी बाई इलाहाबादी (छप्पन छोरी) शामिल रहीं I हिंदुस्तानी संगीत और नृत्य में तवायफों के ऐतिहासिक योगदान पर दोबारा गौर करना इस पटकथा की खास बात है I
अनकही कहानियों का पुन: पथ-गौहर जान और अन्य प्रतिष्ठित कलाकारों का जीवन और कला, कहानियाँ जो कम चर्चित रहीं, संगीतमय पुन: सृजन उस युग की आत्मा को पुनर्जीवित करना, महफ़िलों की नज़ाकत, गायकी की विविधता और नृत्य की शोभा, कला और आत्मसम्मान का सम्मान उनकी प्रतिभा, संघर्ष, स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति एक संवेदनशील और सम्मान जनक श्रद्धांजलि है I गौहर जान की प्रस्तुति संगतकार में तबला और सहायक स्वर अयान चक्रवर्ती तथा स्वर समद्रिता चक्रवर्ती का एवं हारमोनियम पर अनूप नेगी की प्रस्तुति रही I

“विरासत-ए-महफिल” में मशहूर शायर इक़बाल अशहर की शायरी से विरासत हुआ “मदहोश”
…अदब और तहज़ीब की लहर में जमकर चले तराने….. और शायरी नुमा अफ़साने…
मदन मोहन दानिश के भी महफ़िल में रहे जलवे…..
विरासत महोत्सव-2026 की सांस्कृतिक संध्या-ए-महफिल में आज मशहूर शायर अज़हर इक़बाल के मुशायरे ने विरासत को मदहोश करने में कोई कमी नहीं छोड़ी I अदब और तहज़ीब की लहरों में उनके तरानों व अफसानों ने सभी को मदहोश बना दिया और मेहमानों को महफ़िल में जमे रहने पर मजबूर किये रखा I
इक़बाल अशहर भारत के उर्दू भाषा के शायर हैं। उनका जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ। वे अपने पूर्वजों की साहित्यिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, जिनका संबंध अमरोहा से था। अमरोहा अपनी अदबी परंपरा और तहज़ीब के लिए प्रसिद्ध है। उर्दू साहित्य में स्नातक इक़बाल अशहर ने कई पुस्तकें लिखी हैं, जिनमें ‘धनक तेरे प्यारी’ और ‘रातजगे’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उन्होंने भारत के अलावा यूरोप, मध्य-पूर्व और एशिया के विभिन्न देशों में आयोजित अनेक मुशायरों में शिरकत की है। पद्मश्री शिव किशन बिस्सा (शीन काफ़ निज़ाम)
पद्मश्री सम्मान से अलंकृत शिव किशन बिस्सा, जिन्हें उनके साहित्यिक नाम शीन काफ़ निज़ाम के नाम से जाना जाता है, जोधपुर के रहने वाले हैं। वे उर्दू के प्रसिद्ध शायर और साहित्यिक विद्वान हैं।
खास बात यह भी है कि उन्होंने देवनागरी लिपि में अनेक शायरों की रचनाओं का संपादन किया है, जिनमें प्रसिद्ध उर्दू शायर मीराजी और मुनीर नियाज़ी की रचनाएँ शामिल हैं। यही नहीं, उनके काव्य संग्रह ‘गुमशुदा दैर की गूँजती घंटियाँ’ को उर्दू भाषा में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जबकि मदन मोहन दानिश समकालीन उर्दू के चर्चित शायर हैं। वे प्रेम, जीवन और मृत्यु जैसे विषयों पर अपनी गहरी सोच और अनूठे अंदाज़ में शेर कहने के लिए जाने जाते हैं। विभिन्न मुशायरों में उनकी प्रभावशाली उपस्थिति ने उन्हें एक लोकप्रिय शायर के रूप में पहचान दिलाई है। उनका काव्य संग्रह ‘आसमाँ फ़ुर्सत में है’ काफ़ी लोकप्रिय रहा है।
वे ग्वालियर के रहने वाले हैं। उन्होंने आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) में कार्य किया है और मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित हुए हैं I
राजेश रेड्डी समकालीन भारत के प्रसिद्ध हिंदी एवं उर्दू कवि और ग़ज़लकार हैं। उनकी रचनाएँ आम जीवन से जुड़ी भावनाओं और संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करती हैं। उन्हें फ़िराक़ इंटर नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने हिंदी साहित्य में एमए की शिक्षा प्राप्त की। वे लगभग दस वर्षों तक जयपुर के रंगमंच से जुड़े रहे। उन्होंने ‘इतवारी पत्रिका’ में उप-संपादक के रूप में कार्य किया और बाद में आकाशवाणी तथा विविध भारती में निदेशक के पद पर भी अपनी सेवाएँ दीं I जिनमें “मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम-सा बच्चा, बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है।”शामिल हैं I “यहाँ हर शख़्स हर पल हादसा होने से डरता है।” मशहूर शायर मुकेश आलम पंजाबी और उर्दू के शायर हैं। उनका संबंध होशियारपुर और लुधियाना से है। पेशे से वे एक फार्मासिस्ट हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों को साहित्यिक जगत में काफ़ी सराहना मिली है। ‘चराग़ों के हवाले से’ और ‘इश्क़ तेरी सुल्तानी में’ उनके उर्दू ग़ज़लों एवं नज़्मों के संग्रह हैं। वहीं ‘छनकंगना’ उनका पंजाबी कविता संग्रह है। वे भारत और संयुक्त अरब अमीरात में 500 से अधिक मुशायरों में शिरकत कर चुके हैं। अंग्रेज़ी और पंजाबी की पत्रिकाओं में भी उनकी विशेष परिचयात्मक सामग्री प्रकाशित हुई है।मुज़फ़्फ़र अब्दालीमुज़फ़्फ़र अब्दाली लोक प्रशासन (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) में स्नातकोत्तर हैं और वर्तमान में उत्तराखंड के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने लगभग तीन दशक पहले उर्दू शायरी लिखना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी नज़्में और ग़ज़लें विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। उनके प्रमुख काव्य संग्रह आठवाँ दरवाज़ा, दर-ओ-दीवार से आगे,सिफ़र से सिफ़र तक हैं Iअज़हर इक़बाल उत्तर प्रदेश के बुढ़ाना से ताल्लुक़ रखते हैं।

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